सन्दर्भ के बिंदु (निदेश पद)

वित्त संसाधन (सामान्य) अनुभाग की अधिसूचना संख्या 5/2015-आरजी-/918/दस-70/2015-70/2015 दिनांक 29 दिसम्बर 2015 से पंचम् राज्य वित्त आयोग के निदेश पद जारी किये गये है, जो निम्नवत हैं-
  1. राज्य वित्त आयोग, पंचायतों तथा नगरीय स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करेगा तथा श्री राज्यपाल को निम्नलिखित विषयों के संबंध में अपनी संस्तुतियां देगाः-
    1. (अ) सिद्धान्त, जो संनियमित करेंगेः-
      1. (1) राज्य और पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय स्थानीय निकायों के मध्य राज्य सरकार द्वारा उदग्रहीत करों, शुल्को, पथकरों और फीसों के शुद्ध आगम, जो संविधान के भाग-9 व 9ए के अधीन, उनमें विभाजित किये जाने हैं, या विभाजित किये जाय, के वितरण के बारे में और उक्त सभी स्तरों की पंचायतों और नगरीय स्थानीय निकायों के बीच ऐसे आगमों के तत्संबंधी अंश के आवंटन के बारे में;
      2. (2) ऐसे करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों जिन्हें ग्राम / क्षेत्र / जिला पंचायतों और त्रिस्तरीय नगरीय स्थानीय निकायों को समनुदेशित किया जाना है अथवा जिन्हें उनके द्वारा हस्तगत किया जाना है, के अवधारण के बारे में;
      3. (3) राज्य की संचित निधि में से पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय स्थानीय निकायों को सहायता अनुदान के रूप में संदेय राशियों को शासित करने वाले सिद्धान्तों के बारे में;
    2. (ब) त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिये आवश्यक उपायों के बारे में,
    3. (स) कोई अन्य विषय, जिन्हें श्री राज्यपाल द्वारा पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय स्थानीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उददेश्य से वित्त आयोग को निर्दिष्ट किया जाय।
  2. राज्य वित्त आयोग अपनी संस्तुतियां देते समय अन्य के साथ-साथ निम्नलिखित विषयों को भी संज्ञान में रखेगाः-
    1. (¡) राज्य सरकार के वित्तीय संसाधन तथा उ0प्र0 राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबन्ध अधिनियम के प्राविधानों के अधीन राज्य सरकार की वचनबद्धता
    2. (¡¡) सभी स्तरों की ग्रामीण एवं नगरीय स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति का आंकलन एवं निकायों के संसाधनों में बढोत्तरी हेतु सुझाव। निकायों के संसाधनों में अभिवृद्धि हेतु प्रोत्साहन
    3. (¡¡¡) चौदहवें वित्त आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के अन्तर्गत केवल ग्राम पंचायतों हेतु संस्तुत अनुदान के परिपे्रक्ष्य में अन्य पंचायती राज संस्थाओं (क्षेत्र एंव जिला) की वित्तीय आवश्यकताओं का आंकलन
    4. (¡v) स्थानीय निकायों द्वारा प्रदान की जा रही मूलभूत सेवाओं का आंकलन, सेवाओं को स्तर, उपलब्धता पहुॅच, समावेश और गुणवत्ता
    5. (v) सभी स्तर की स्थानीय निकायों की परिसम्पत्तियों का रख-रखाव
    6. (v¡) निकायों में वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से सभी स्थानीय निकायों के आय एवं व्यय के संबंध में डेटा बेस
    7. (v¡¡) आयोग सभी पंचायतों तथा नगरीय की 31 मार्च, 2014 को अदत्त ऋण की स्थिति का आंकलन करेगा और ऐसे सुधारात्मक उपाय सुझायेगा,जो उनके ऋण दायित्वों के नियंत्रण के लिये आवश्यक हो,
  3. आयोग की पंचाट अवधि के मध्य किसी भी स्तर के स्थानीय निकाय (नगरीय एवं ग्रामीण) के क्षेत्रफल/जनसंख्या में परिवर्तन होने अथवा निकायों की संख्या परिवर्तित होना/ उच्चीकरण की दशा में आयोग द्वारा संतुत किए गये संक्रमण के पुनः निर्धारण के सम्बन्ध में मार्गदर्शी सिद्धान्तों की संस्तुति करेगा।
  4. उत्तर प्रदेश (पंचायती राज और स्थानीय निकाय) (नियुक्ति और सेवा की शर्ते) वित्त आयोग (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2001 के अनुसार अपने कृत्यों के सम्पादन के लिए राज्य वित्त आयोग में निम्न शक्तियाॅ निहित होगी,
    1. (1) आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित मामलों को निपटाने के लिए सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होगी-
      1. (क) साक्षी को समन करना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना।
      2. (ख) किसी दस्तावेज का प्रस्तुति करना।
      3. (ग) न्यायालय या किसी कार्यालय से पुनः प्राप्ति करने वाला कोई सार्वजनिक दस्तावेज।
    2. (2) आयोग को किसी व्यक्ति से उसके अधीन विचारार्थ किसी मामले से सम्बन्धित कोई आवश्यक और उपयोगी सूचना प्रस्तुत करने के लिए निदेश देने की शक्ति होगी और इस प्रकार निर्देशित व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 176 के अधीन आज्ञानुसार विधिक रूप से ऐसी सूचना प्रस्तुत करने का दायी समझा जायेगा, किसी तरह सूचना उस समय पर लागू किसी नियम द्वारा आच्छादित होगी।
  5. राज्य वित्त आयोग पूर्वाेक्त प्रत्येक विषय पर 01 अपै्रल, 2016 से प्रारम्भ होने वाले पांच वर्ष की अवधि के लिये अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करायेगा।

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